Tuesday, August 30, 2016

Sher-o-shayri - collection in the making


निगाँहें मिलाकर बदल जाने वाले,
मुझे तुझसे कोई शिकायत नहीं,
ये दुनिया बड़ी संगदिल है,
यहाँ किसी को किसी से मोहब्बत नहीं |

Saturday, February 20, 2016

दिल


अजीब सी दशा है दिल की,

बिना पिंजरे का कैदी हो गया है... 

उड़ने की ख्वाइस थी हमेशा 

अब जब मिला है आसमां खुला ...

सहि -गलत कि बेड़ियों से बंधा है  । 



 पी.एस : आज मन हुआ हिन्दी में लिखूँ :)
 पी.एस : लिखने कुछ और बैठी थी, लिखा कुछ और :D
 पी.एस : घर कि बहुत याद आती है आजकल :(